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अनाज में बहुत सरे प्रोटीन, विटामिन, खनिज तत्व और की सारे पोषक तत्व पाए जाते है, जो हमारे शरीर के अत्यंत आवश्यक होते है। इसलिए इस पोस्ट में आपको अनाज के नाम हिंदी और अंग्रेजी के अलावा ये बतायेगे की कौन से अनाज में कौन सा पोषक तत्व पाया जाता है।

अनाज के एक दाने को तीन हिस्सों में और तीनो हिस्सों में पोषक तत्व जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते है। तो चलिए अब अनाज के नाम हिंदी और अंग्रेजी जानते है।

अनाज के नाम हिंदी और अंग्रेजी में

अंग्रेजी में अनाज के नाम अंग्रेजी में उच्चारण हिंदी में अनाज के नाम
Wheatव्हीटगेहूं
Riceराइसचावल
Pot Barleyपॉट बार्लेजौ
Maizeमेज़मक्का
Cracked Wheatक्रेकेड व्हीटदलिया
Pearl Milletमिलेटबाजरा
Rice Bubblesराइस बबल्समुरमुरे
Lentilलेंटिलमसूर की दाल
Black gramब्लैक ग्रामकाले चना
Buckwheatबकव्हीटकुट्टू
Chickpeasचिकपेसाकाबुली चना
Ragiरागीमंड़ुआ
Semolinaसेमोलिनासूजी
Sagoसागोसाबूदाना
Rice Puffedरागीमुरमुरा
Sorghumकॉर्नफ़्लेक्सज्वार
Cornflakesकॉर्नफ़्लेक्समकई के भूने हुए फूल
Flaked riceफ्लेक्ड राइसचिवड़ा / पोहा
Tur dalतुर दालतुअर की दाल
gramग्रामचना
Peanutपीनटमूंगदाल
Sesame seedमोलेतिल
peasपीजमटर
carom flowersकार्टोम फ्लावर्सअजवायन के फूल
Castorकास्टरअरंडी
Linseedलिनसीडअलसी
Branब्रानचोकर
kidney beansबीन्सराजमा
Oatओटजई
Mustardमस्टर्डसरसो
Pumpkin Fruitपम्पकिन फ्रूटकद्दू के फल
Sun flowerसनफ्लॉवरसूरज मुखी के फूल
Fenugreekफेनुग्रीकमैथी
  1. गेहूँ ( Wheat )

गेहूँ में मुख्य रूप से सीलियम, रेशे और विटामिन ई पाया जाता है, जो हमारे शरीर में बढ़ रही कैंसर कोशिकाओ को बढ़ने नहीं देता है।

भारत देश की सरकार ने महिलाओ और बच्चो में सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ती के लिए कृषि अनुसंधान संस्थाओ में गेहूँ की एच डब्ल्यू 52007, एचआई 1612, और एचआई 8777 किस्मो का विकाश करने का अनुरोध किया, क्योकि इसमें जिंक, तांबा, मैगनीज, प्रोटीन और लोह तत्व पाए जाते है।

इन किस्मो से बने खाद्य को आगनबाड़ी और अस्पताल में बटवाया जाता है ताकि जिन बच्चो में पोषक तत्वों की कमी हो उन्हें भी भरपूर्ण पोषण मिले।

2. चावल ( Rice )

चावल में अनेक प्रकार की पोषक तत्व है, जैसे कैल्शियम, फाइबर, आयरन, थायमिन, प्रोटीन और राइबोफ्लेविक तो पाया ही जाता है इसके अलावा चावल को मिनरल्स और विटामिन भरपूर मात्रा में पाया जाते है।

चावल को हम रोज के खाने में इस्तमाल करते है जिससे हमारे शरीर में कार्बोहाइड्रेड, कॉम्प्लेक्स और विटामिन बी की होती है।

अतिसार और पेचिश होने पर आप चावल को दूध या दही के साथ मिला कर खाये। आप शायद जानते होंगे की चावल जल्दी पच जाता है, इसलिए जब आपको अपच की समस्या हो तो आप अपने खाने में चावल को जरूर शामिल करे।

3. मक्का ( Maize ) –

मक्के में सर्वाधिक मात्रा में कैरोटिनॉइड, बायोफ्लेविनोइड्स, फाइबर और विटामिन सी पाया जाता है मक्के में कॉलेस्ट्रॉल कम करने की क्षमता पाई जाती है, साथ ही यह धमनियों को ब्लॉक होने से रोकता है।

इसमें मजबूत फाइबर पाया जाता है जो कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक होता है। मक्के में विटामिन ए और सी अच्छी मात्रा में पाया जाता है इसीलिए इसके सेवन से हमारी त्वचा खूबसूरत बनी रहती है।

इसमें आयरन, जिंक, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम और विटामिन डी पाया जाता है यह सारे तत्व हमारे शरीर की हड्डियों को मजबूत बनाते है।

4. दलिया ( Cracked Wheat ) –

दालिया बच्चो की सेहत लिए ज्यादा फायदेमंद होता है क्योकि दलिया में कैल्सियम, मिनरल, फाइबर, विटामिन डी और एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो बच्चो के विकाश के आवश्यक होते है।

दलीय को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है, दलिया में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर पाए जाते है जो कॉलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते है। यदि ह्रदय रोगी को प्रतिदिन दलिया खाने में दिया जाए तो उसको ह्रदय रोग से छुटकारा मिल सकते है, और जो लोग रोजाना दलिया का इस्तमाल खाने में करते है तो उन्हें कभी भी ह्रदय रोग नहीं हो सकता है।

5. बाजरा ( Pearl Millet ) –

बाजरा में मैग्नीशियम, पोटैशियम, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर पाया जाता है इसमें मैग्नीशियम और पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है, इसमें भी फाइबर पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में सहायक होता है।

बाजरे में पाए जाने वाला मैग्नीशियम जो मधुमेह को कम करता है, मैग्नीशियम एक ऐसा खनिज तत्व है जो ग्लूकोज रिसेप्टर और इंसुलिन की क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

बाजरे का सेवन करने से कब्ज, गैस, ऐठन और पेट फूलना जैसी समस्याओ को दूर करता है, इसका सेवन करने से स्तनकैंसर जैसी बड़ी संभावना को दूर किया जा सकता है।

7. मसूर की दाल ( Lentil ) –

मसूर की दाल में कफ शामक गुड पाया जाता है यह गुण वजन कम करने में सहयोगी होता है।

मसूर की दाल में प्रीबायोटिक कार्बोहाइड्रेड और डायटरी फाइबर पाए जाते है जो भोजन को पचाने में सहायक होते है, मसूर की दाल मोटापा, कैसंर, मधुमेह और ह्रदय जैसे रोगो का जोखिम कम करती है।

इस दाल में पेप्टाइड्स पाए जाते है जो शरीर में एंटीमाइक्रोबियल जीवाणु रोधी गतिविधि को बड़ा सकता है साथ ही यह इंसुलिंस बढ़ाने में भी मदद करता है।

मसूर कि दाल में कैल्सियम, मैग्नीशियम और फास्फोरस पाया जाता है जो हड्डियों और दांतो को मजबूत बनाने में सहायक होती है।

8. उड़द ( Black gram ) –

उड़द की दाल काले छिलके की होती है इसमें घुलशील रेशा, विटामिन सी, आयरन, विटामिन बी, थायमिन, नियासिन, कैल्सियम, राइबोफ्लेविन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाए जाते है।

उड़द दाल को सप्ताह में एक बार जरूर किसी तरह का पकवान बना कार जरूर खाना चाहिए क्योकि इसे खाने से वीर्य बर्धक, बलवर्धक, शुक्राणु बढ़ाने वाली, रक्त प्रकोप को कम करता है, कफपित्तवर्धक और जो लोग अधिक परिश्रम करते है उनके लिए यह दाल बहुत फायदेमंद होती है।

9. कुट्टू ( Buckwheat ) –

कुट्टू का सेवन रोटी बना कर किया जाता है, इसमें मैग्नीशियम, फाइबर, प्रोटीन और लोह तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते है।

इसका सेवन सभी लोग कर सकते है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जिन्हे कुछ दवाइयों की वजय से उन्हें गेहूँ की रोटी से गेहूँ की बने किसी भी खाद्य को खाने से एलर्जी होती है तो वह कुट्टू की बनी रोटी खा सकते है इससे उन्हें किसी प्रकार की एलर्जी नहीं होगी।

कुट्टू का सेवन करने से पित्त की पथरी को बढ़ने से रोका जा सकता है, रक्तचाप को नियंत्रित किया जा सकता है, अस्थमा के मरीजों के लिए इसका सेवन जरूर करना चाहिए इसके सेवन से उन्हें बहुत फायदा होगा।

9. काबुली चना ( Chickpeas )

काबुली चने को प्रोटीन का मुख्य स्रोत माना जाता है, इसके अलावा इसमें फाइबर, विटामिन, मिनरल और फीटो न्यूट्रिएंट भी पाए जाते है।

काबुली चने का सेवन उन्हें करना चाहिए जो जिम जाते है उन्हें चने बहुत ही फायदेमंद होते है, इसके अलावा कबूली चने खाने से हड्डी मजबूत होती है, बजन कम करने में, कैंसर से बचने में, महिलाओ में हार्मोन्स को नियंत्रित करने में, पाचन ठीक करने जैसी बहुत सारी समस्याओ से राहत पाने में काबुली चने का इस्तमाल किया जाता है।

10. मंड़ुआ ( Ragi ) –

मंडुआ को रागी के नाम से भी जाना जाता है, इसे अनाज में शामिल किया गया है क्योकि इसमें बहुत सारे ऐसे तत्व पाए जाते है जो हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते है।

यह केवल खाने में स्वादिष्ट होता है जैसे गेहूँ का आता होता है ऐसे ही इसका इस्तमाल बहुत से स्वादिष्ट पकवान बनाने में मिया जाता है।

कुट्टू का सेवन आप रोटी बना कर भी कर सकते है इसके सेवन से शरीरिक कमजोरी, अधिक प्यास लगना, त्वचा बिकार, शरीर में जलन, किडनी और पथरी जैसी समस्याओ को ठीक करने में इसमें इस्तमाल किया जाता है।

11. सूजी ( Semolina ) –

हम सभी जानते है की सूजी को गेहू से ही बनाई जाती है इसीलिए जो गुण गेहूँ में पाए जाते है वही गुण सूजी में भी पाए जाते है लेकिन कुछ लोगो को गेहूँ के बने व्यंजन पसंद नहीं होते है इसीलिए उन तत्वों की पूर्ती के वो लोग सूजी से बने व्यंजन खा सकते है।

सूजी में विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन बी 1, विटामिन बी 2, विटामिन 3, विटामिन 6, फोलेट 9, विटामिन 12, प्रोटीन, फाइबर, कार्बोहाइड्रेड, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम के अलावा सोडियम और जिंक भी पाए जाते है।

हमारे शरीर में एनर्जी बनाये रखने के लिए खनिज, पोषक तत्व और विटामिन की जरूरत होती है जो सूजी में भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

12. साबूदाना ( Sago ) –

साबूदाना में सबसे ज्यादा वसा, कोलेस्ट्रॉल और सोडियम पाया जाता है, साबूदाना को प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत माना जाता है।

इसके अलावा साबूदाना में मैंगनीज, कैल्शियम, तांबा, सेलेनियम, फॉलेट, विटामिन बी 6, लोहा, टैपियोका और पैंटोथैनिक भी पाया जाता है इसलिए व्रत में इसका सेवन करने के बाद हमे एनर्जी मिलती है और हमे जल्दी भूख भी नहीं लगती है।

यदि किसी मारीज को साबूदाना की खीर बना क्र खिलाई जाती है तो उनके शरीर में एनर्जी बनी रहती जिससे मरीज कमजोर नहीं हो सकता है साबूदाना आसानी से पच भी जाता है।

13. मुरमुरा ( Rice Puffed ) –

मुरमुरे का सेवन बच्चो आवश्यक कराना चाहिए क्योकि मुरमुरे में फाइबर, कैल्शियम लोहा, विटामिन बी 1 विटामिन बी 2 और विटामिन डी पाया जाता है जो दांतो और हड्डियों को मजबूत बनाता है।

बच्चो के अलावा सभी के इसका सेवन करना चाहिए क्योकि इसमें आंतो में बेहतर कार्य करने के फायदेमंद बैक्टीरिया के विकाश को बढ़ावा देता है मुरमुरा कब्ज और नकसीर को रोकने में मदद करता है।

मुरमुरा चाय के साथ खाने में ज्यादा फायदा करता है क्योकि इसमें एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

यदि आप मुरमुरे को पानी में भिगो कर साबुन के कैसा अपने चहरे पर लगाते है तो इससे आपकी त्वचा को नमी मिलती है इसके आलावा यदि कभी भी आपके चहरे पर मिर्ची लग जाए तो भी आप मुरमुरा को पानी में भिगो कर अपने चहरे पर लगा सकते है इससे आपके चहरे की जलन कम हो जाती है।

14. ज्वार ( Sorghum ) –

ज्वार में सबसे अधिक मात्रा में प्रोटीन, मिनरल और विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते है, इसके अलावा इसमें आयरन, कैल्सियम, पोटेशियम और फॉस्फोरस पाया जाता है।

डायविटीज के मरीज को ज्वार की बनी रोटी खाने की सलाह दी जाती है क्योकि ज्वार रक्त में घुली शर्करा और स्टार्च को कम कर देता है जिससे डायविटीज नियंत्रित हो जाता है।

इसके अलावा ज्वार के सेवन से ये फायदे भी होते है जैसे कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाता है, वजन कम करने के लिए, कैंसर से बचाने में, मुहांसो को कम करने में और ज्वार के दानों को भून कर खाने से खांसी में आराम मिलता है।

16. चिवड़ा / पोहा ( Flaked rice ) –

पोहे में आयरन और कार्बोहाइड्रेड भरपूर मात्रा में पाया जाता है इसीलिए बच्चो और गर्भवती महिलाओ को पोहे का सेवन सुबह के नास्ते में जरूर करना चाहिए।

पोहे को और भी पोषण से भरपूर बनाने के लिए आप इसमें अंकुरित बीज, मटर, मूंगफली और सब्ज़िया भी मिला सकते है इससे आपका पोहा हेल्दी और स्वादिष्ट बन जाता है।

पोहे को कच्चे चावल से बनाया जाता है लेकिन इसमें चावल से ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते है इसीलिए इसका सेवन सबको करना चाहिए क्योकि माना जाता है की सुबह का एक प्लेट नास्ता पूरे दिन एनर्जी देने में काम आता है।

17. तुअर की दाल ( Tur dal ) –

दालों को विटामिन का अच्छा स्रोत माना जाता है तुअर की दाल में फोलिक एसिड पाया जाता है जो महिलाओ के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है, इसके अलावा इसमें कैल्सियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम, विटामिन बी, मिनरल और आयरन पाया जाता है।

तुअर की दाल बजन कम करने में बहुत सहायक होती है क्योकि इसके सेवन से बहुत देर तक भूख नहीं लगती है।

तुअर की दाल रोगप्रतिधोक क्षमता बढ़ाती है, क्योकि तुअर दाल में इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुण पाया जाता है जो रोगो से लड़ने में शरीर क्षमता बढ़ाता है।

18. चना ( Gram )

चने को भिगो कर खाने से बहुत फायदेमंद होता है, इसमें फाइबर, पोटेशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन डी और फास्फोरस भरपूर मात्रा में पाया जाता है।

देशी चने को खाने से वजन कम होता है, पाचन तंत्र को ठीक रखता है, कैंसर, आँखो के लिए हड्डियों के लिए एनीमिया और महिलाओ में हार्मोन्स को कम करने में किया जाता है।

19. मूंगदाल ( Peanut ) –

मूंगदाल में फ़ेलोनिक एसिड, कार्बनिक एसिड, अमोनी एसिड, कार्बोहाइड्रेड, और लिपिल जैसे पोषक तत्व पाए जाते है।

इसके अलावा इसमें एंटीमाइक्रोबियल, एंटीडायबिटिक, एंटीहाइपरटेसिव और एंटीट्यूमर पाया जाता है जो बहुत सारी बीमारिया को दूर करने में मदद करता है।

किसी भी रोग के मरीज मूंगदाल खिलाई जा सकती है इससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, जिन लोगो के लिए कब्ज कि समस्या होती है वे लोग छिलके वाली मूंगदाल को बना कर खाना चाहिए।

20. तिल ( Sesame seed ) –

तिल में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते है जिन में से कुछ जैसे मैग्नीशियम, जिंक, सेलेनियम, कैल्सियम, आयरन, प्रोटीन और एमिनो एसिड पाया जाता है।

तिल का सेवन करने से मानशिक दुर्बलता ठीक की जा सकती है, तिल का सेवन रोजाना करने से समय के पहले बालो सफेद होना या झड़ना दोनों को ही रोका जा सकता है।

यदि किसी को बवसीर की समस्या है तो उसे दो चम्मच तिल रोज खाली पेट चबाने देनी चाहिए और तिल चबाने के बाद उसे एक गिलास ठंडा पानी पीने के लिए दीजिये इससे उस व्यक्ति को बहुत आराम मिलेगा।

21. मटर ( Peas ) –

मटर के पौधे में कॉपर, मैगनीज, जिंक, आयरन और एंटीऑक्सीडेंड पाए जाते है जो हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

मटर का सेवन करने से ह्रदय से संबंधित समस्याओ का इलाज किया जा सकता है, क्योकि इसमें कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता पाई जाती है।

मटर का सेवन करने से शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित किया जा सकता है, इसमें ऐसे गुण पाए जाते है जिनसे वजन कम किया जा सकता है।

22. अजवायन के फूल ( carom flowers ) –

अजवायन हमारे पेट के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है क्योकि इसमें फनोल, लिनोलिक, कैम्फीन, क्यूमिन, राइबोफ्लेविन, अवाष्पशील तेल, पॉमिटिक, निकोटिनिक अम्ल और थाइमिन पाया जाता है जो हमारे पेट हो रहे किसी भी प्रकार के दर्द को कुछ ही मिनट में खत्म कर देता है।

यदि किसी को सर्दी हो तो उसे अजवायन को सूती के कपड़े में बांध कर आंच में गर्म कर ले और सुख ले ऐसा आपको चार पांच बार करना है इससे आपकी सर्दी ठीक हो जायेगी, यदि आपके दांत में दर्द हो उसी दांत के नीचे दबा ले आपको बहुत आराम मिलेगा।

23. अरंडी ( Castor ) –

अरंडी के जो बीज होते है उनसे तेल निकला जाता है इस तेल में वसीय अम्ल और ओमेगा 3 भरपूर मात्रा में पाए जाते है।

इसके तेल का इस्तमाल बालो को खूबसूरत बनाने के साथ झड़ने से रोकता है, अरंडी का इस्तमाल साबुन बनाने में, दवाइयाँ बनाने में और जिन तेलों से मसाज की जाती है उनमे भी किया जाता है।

अरंडी की खेती करने के लिए किसी खास मौसम की जरूरत नहीं होती है, साथ ही यह किसी भी परिस्तिथि में पैदा हो जाते है ये गर्मी के मौसम में भी हरे भरे रहते है।

24. अलसी ( Linseed ) –

अलसी का सेवन करने से ह्रदय से संबंधित रोगो से निजात पाया जा सकता है, इसमें कोलेस्ट्रॉल 0 mg, कैल्सियम 0.25, सोडियम 30 mg, प्रोटीन 18 mg, कार्बोहाइड्रेड, फाइबर जैसे तत्व तो पाए ही जाते है इसके अलावा इसमें कैलोरी और पोटेशियम सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते है।

इसमें एंटीऑक्सीडेंट यह एंटीवायरल और एंटी बैक्टीरियल होता है जिससे जुखाम और आम फ़्लू से बचने में आपकी मदद करता है, अलसी में कोलेस्ट्रॉल को कम करता है कैंसर जैसी खतराक रोग से लड़ने में सहायक होता है।

26. राजमा ( kidney beans ) –

राजमा में मैग्नीशियम, फोलेट, कॉपर, आयरन विटामिन सी और कैल्सियम पाया जाता है इसमें फाइबर पाया जाता है यह पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है।

राजमा में पाए जाने पोषक तत्व वजन में कम करने में सहायक होते है, डायबिटीज कंट्रोल करते है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करते है, दिमाक तेज करते है, हड्डिया मजबूत करता है।

राजमा का सेवन सप्ताह एक बार जरूर करना चाहिए क्योकि इसमें ऐसे पोषक तत्व पाए जाए है हर उम्र के व्यक्ति को फायदेमंद होते है, खास कर बच्चो को खिलाना चाहिए क्योकि इसमें कैल्सियम और आयरन पाया जाता है जो बच्चो के शरीर के लिए आवश्यक होता है।

27. जई ( Oat ) –

जई में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, विटामिन बी2 और विटामिन भरपूर मात्रा में पाए जाते है यह विटामिन हमारे शरीर में रोगो से लड़ने की क्षमता बढ़ाते है।

जई में पाए जाने वाले में फाइबर बीटा ग्लूकॉन पाया जाते है जो ग्लाइसोमिक प्रभाव को कम करता है जिससे और इंसुलिन ले प्रभाव को सक्रिय करने का कार्य करता है जिसके कारण रक्त में शुगर की मात्रा को संतुलित किया जाता है, साथ यह फाइबर कोलेस्ट्रॉल को कम करता है।

इसके अलावा जई के सेवन से कब्ज, पाचन क्रिया, बेहतर नींद, इम्युनिटी को बढ़ाता है और वजन कम करता है।

28. सरसो ( Mustard ) –

सरसो में पोटाश, फास्फोरस, नत्रजन, डायसेलिग्लिसरॉल, ग्लूकोज, सरसो, कॉपर, मैग्नीशियम आयरन और सेलेनियम पाया जाता है।

सरसो के तेल में मस्टर्डड आयल के नाम से भी जाना जाता है इसके इस्तमाल खाने में किया जाता है तो कैंसर, रक्तचाप, वजन कम करने में, कोलेस्ट्रॉल कम करने में, रतौंधी, फाइबर, सर्दी बुखार जैसे समस्याओ से दूर रहती है।

30. सूरज मुखी का फूल और बीज ( Sun flower ) –

सूरज मुखी के बीज में विटामिन ई, बीटा कैरोटीन, कॉपर और एंटी ऑक्सीडेंट जैसे गुण पाए जाते है।

सूरजमुखी के बीज में पाए जाने वाले बीटा कैरोटीन नामक गुण त्वचा में झुर्रियों आने से रोकता है

31. मैथी ( Fenugreek ) –