इस आर्टिकल में हम प्रकृति में पाए जाने वाले कीड़ो के नाम की जानकारी को पढ़ेंगे।

प्रकृति में अनेक प्रकार के कीड़े-मकोड़े पाए जाते है जिनकी शरीरिक संरचना अलग-अलग होने के साथ यह अलग-अलग वातावरण में रहते है।

कुछ जहरीले होते है, कुछ कई सालो तक जीवित रहते है तो कुछ एक दिन से भी कम समय में ही मर जाते है।

चलिए इन सभी कीड़ो को पहचानते है।

हिंदी और इंग्लिश में कीड़ो के नाम

1. कीड़ा – Bug (बग)

कीड़ा

प्रकृति में सबसे अधिक मात्रा में कीड़े मकोड़े ही पाए जाते है जिनका अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है।

2. केंचुआ – Earth Worm (एअर्थ वर्म)

केंचुआ

भारत में केंचुआ की कई प्रजातिया पाई जाती है यह गीली मिटटी में पाए जाते है ज्यादा तर यह बारिश के मौसम में देखने को मिलते है।

केंचुए की केवल दो प्रजातियों फेरिटाइमा और यूटाइफियस को आसानी से प्राप्त किया जाता है।

केंचुआ को किसान का मित्र माना जाता है क्योकि केंचुए में 2.5 से 3% नाइट्रोजन, 1.5 से 2% सल्फर और 1.5 से 2% पोटाश पाया है केंचुए मिट्टी को खा कर अपने अंदर पाए जाने वाले इन पोषक तत्वों को मिटटी में मिला देते है जिससे किसानो को फायदा होता है।

3. अल्पायु मक्षिका – Mayfly (मैफली)

अल्पायु मक्षिका

अल्पायु मक्षिका का आकार दिखने में बिल्कुल मक्खी के जैसा होता है लेकिन इसमें चार पंख होते है पूछ लम्बी होती है।

अल्पायु मक्षिका गंदे नालो में पेड़ – पौधों में या तालाबों के पास अधिक देखने को मिलते है। इन्हे वारिस के मौसम में अधिक देखा जाता है।

4. इल्ली – Caterpillar (कैटरपिलर)

इल्ली

इल्ली हरे पेड़ पौधों की पत्तियों में पाई जाती है इल्ली पेड़ पौधों के पत्ती और तने खा कर जीवित रहती है।

जितनी भी तितलियाँ या मोथ है वह अपने अंडे में इल्ली के जैसा ही रहते है धीरे-धीरे इल्ली काआकार बढ़ता जाता है जिससे इल्ली अपने वास्तविक रूप में आ जाती है।

इल्ली के सिर पर 12 जोड़ी आँखे पाई जाती है जिन्हे ओसिली कहा जाता है दो जोड़ी जबड़े पाए जाते है जिन्हे मेंडिबल्स कहा जाता है।

इल्ली का शरीर लचीला होता है दिखने में ऐसी लगती है जैसे इल्ली को खींचा जाये तो यह बड़ी हो जाएगी लेकिन इसे खींचते ही यह टूट जाती है।

5. केकड़ा – Crab (क्रैब)

केकड़ा

केकड़ा समुद्र में पाए जाने वाला जीव है केकड़े का वैज्ञानिक नाम ब्रजपुरा है, इसकी आठ टांगे और दो पंजे होते है।

केकड़े समुद्र में उथले गहरे कही पानी में पाए जाते है इनका रंग अलग-अलग होता है समुद्र में पाया जाता है इसीलिए आर्थोपोडा संघ की जीव माना जाता है।

इनका शरीर गोलाकार और चपटा होता है और सिरोवक्ष और उदर में बटा होता है केकड़े मछली, कीड़े और हरी पत्तिया घास पूस भी खाते है इसीलिए यह शाकाहारी और मांशाहारी दोनों तरह के होते है।

केकड़े दो प्रजाति के होते है छोटे केकड़े और बड़े केकड़े दोनों को अलग-अलग नामो से जाना जाता है बड़े केकड़े को हरे मड क्रैब और छोटी प्रजाति को रेड क्लॉक के कहा जाता है।

6. किलनी – Tick (टिक)

किलनी

किलनी एक बाह परजीवी कीड़ा है यह स्तनधारी, सरीसृप और पक्षियों के बाह शरीर पर परजीवी के रूप में जीवन यापन करता है।

किलनी कीड़ा शरीर के बाहरी आकार पर होने के कारण उनके शरीर से खून चूसता रहता है अपने पालन पोषण करता रहता है।

किलनी गाय के बछड़ो, बछियों, कुत्ते और बकरियों जैसे जानवरो में लाइम रोग, ज्वर और बबेसिओसिस रोग फैलाता है।

किलनी जैसे कीड़े होने वाले रोगो से बचाने के लिए नवजात बच्छे और बछियों की प्रति दिन अच्छे से सफाई करनी चाहिए, क्योकि यही छोटे-छोटे कारण इनकी मृत्यु का कारण बन जाते है।

7. कनखजूरा – Centipede (सेंटीपीड)

कनखजूरा

कनखजूरा एक जहरीला कीड़ा है जिसके काटने से जान भी जा सकती है।

कनखजूरा दिखने में चपटा भूरा या भड़कीले रंग का होता है इसके सिर के नीचे की और दो विषैले डंक होते है। कनखजूरे की टांगे विषम जोड़े में होती है कनखजूरा छोटे-छोटे कीड़े मकोड़ो को अपना भोजन बनाता है।

कनखजूरे की बहुत सारी प्रजातिया पाई जाती है जिनमें से एक जिओफिलिड जिसमे 191 तक टांगो की संख्या होती है।

कनखजूरे के काटने से शरीर में आक्सीजन की मात्रा कम होती है जिससे शरीर में थकान होती है और शरीर एठने लगता है।

8. कलापक्ष – Hymenopterans (हीमेनोप्टेरन्स)

कलापक्ष

कलापक्षी की शरीरिक संरचना चींटी के जैसी होती है फर्क बस इतना होता है कि चींटी में पंख नहीं होते है और कलापक्षी की पीठ पर दो पंख लगे होते है।

कलापक्षी एक जहरीला कीड़ा है कलापक्षी कीड़ा फूलो के रस को अपना भोजन बनाता है इसलिए यह सबसे ज्यादा बगीचों में देखने को मिलते है।

9. खटमल – Bedbug (बड़बूज)

खटमल

खटमल एक परजीवी कीड़ा है जो गंदगी में या विस्तर में पनपते है और इंसान का खून चूस कर जिंदा रहते है।

खटमल दिखने में भूरे और लाल होते है मादा खटमल अपने पूरे जीवनकाल में दौ सौ से चार सौ अंडे देती है।

खटमल कई सारे रोग फ़ैलाने का कारण होते है जैसे खुजली, एलर्जिक रिएक्शन, लालिमा और फफोले, चगास रोग, नींद न आना और एनाफ्लैटिक शॉक जैसे रोग फैलते है जिससे कमजोरी, तनाव और बुखार आना शुरू हो जाता है।

खटमल से बचने के लिए अपने घर के आस- पास हमेशा सफाई रखे और अपने विस्तर को आठ दिन में एक बार जरूर धोये।

10. गिरगिट – Chameleon (चमेलों )

गिरगिट

गिरगिट पेड़ पौधों में रहता है इसके चार पैर होते है जो पक्षियों के समान दिखते है।

गिरगिट को छिपकली का क्लेड माना जाता है गिरगिट थूथन और माथे पर काटे जैसी संरचना होती है बड़े गिरगिट की पूँछ लम्बी, लचीली और बड़ी होती है।

इनके पैर पक्षियों के जैसे होने के कारण यह बड़ी ही आसानी से शाखा और टहनी पकड़ कर पेड़ पर कहीं भी चढ़ जाते है।

गिरगिट शिकारी से बचने लिए अपना रंग बदल लेता है गिरगिट की आँखे अलग-अलग प्रकार की होती है लेकिन शिकार करने के लिए एक सामान कार्य करती है।

11. गाल मक्खी – Gall Midge (गॉल मिज)

गाल मक्खी

मक्खिया सबसे ज्यादा गंदे स्थानों पर देखने को मिलती है मक्खियों की बजय से न जाने कितने रोग फैलते है।

एक मक्खी में 2 आँखे होती है जिसमे से एक आँख में 3000 से 6000 आँखे होती है ये छोटी छोटी आँखे मिल कर एक बड़ी तस्वीर बनाती है और ये आँखे मक्खी को दाये बाये सामने आगे पीछे देखने में सहायता करती है।

एक मक्खी 15 से 20 दिन तक जीवित रहती है और अपनी वयस्क अवस्था में एक बार में 500 अंडे देती है।

12. गुबरैला – Dung Beetle ( डुंग बीटल )

गुबरैला

गुबरैला कीड़ा गोबर में पहाड़ी क्षेत्र में और भैस या गाय के स्तन पर पाए जाने वाला कीड़ा है।

गुबरैला गोबर को प्राकृतिक तोर पर डिंकपोज कर देती है और खाद बना देती है गोबर को खाद बनाने में 5 से 6 महीने लग जाते है।

गुबरैला पेड़ पौधों की पत्तिया खा कर पेड़ पौधों को पत्ती विहीन कर देते है। गुबरैला की तीन जातिया पाई जाती है जिनमे से गुबरैला मई और जून में सबसे अधिक देखे जाने वाला कीड़ा है।

शाम के समय मिटटी से बाहर निकलते है और जंगलो में या कही भी फलो वाले वृक्षों पर बैठ कर उन्हें खाते है और उजेला होते है यह वापस से मिटटी में अंदर चले जाते है।

13. घोंघा – Snail (स्नैल)

 घोंघा

घोघा आद्रभूमि में उगाई जाने वाली धान और केचुओं के द्व्रारा बनाई गई सुरग में रहते है। सड़े गले जैविक पदार्थो पर जैसे फसलों की पत्तियों पर जड़ो और कंदो पर भोजन करते है।

घोंघे के अंडे चमकीले गुलाबी रंग होते है जो गुच्छो में होते है धान में रहने वाले घोंघे का रंग सामान्य जगह में रहने वाले घोंघे से अलग होता है।

इस कीड़े का जीवन काल 119 दिन से 5 वर्ष तक होता है ठंडे स्थान पर ज्यादा है तापमान बड़ने से घोंघे का जीवन काल कम होता जाता है।

15. चींटी – Ant (अंट)

चींटी

चींटी एक सामाजिक कीट है जिसे फ़ोरमिसिडाए और हाइमेनोप्टरा कुल में रखा गया है चींटी के दो पेट होते है।

चीटीओ की लाल प्रजाति होती है जिसमे औषधी गुण पाए जाते है जिसके कारण लाल चीटियों की मांग सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में है।

चीटियों के कान नहीं होते है यह धरती में होने वाले कंपन के कारण अपने और आने वाले किसी भी वस्तु या इंसान की पहचान कर लेती है और अपना रास्ता बदल देती है।

16. जोंक – Leech ( लीच )

जोंक

जोंक नमी वाले स्थानों पर कही भी जैसे तालाब, नदी समुद्र में पाया जाता है।

जोंक एनिलिडा संघ का जन्तु है यह उभयचर होता है जोंक का शरीर चपटा होता है जो खंडो में विभक्त होता है।

जब आप तालाब या समुद्र नहाने जाते हो तो वहा जोंक के चिपकने का डर होता है जब यह हमारे पैर में चिपकती है तो इसे उतरना बहुत मुश्किल हो जाता है और जब यह हमारे शरीर में कही भी चिपकती है तो उस जगह चिपक कर खून चूसना शुरू कर देती है।

जोंक का हमारे शरीर में चिपक कर खून चूसने से बहुत सारे फायदे भी होते है यह हमारे शरीर से दूषित खून को बाहर निकालती है जिससे हमारे शरीर में खाज खुजली, डायबिटीज और गंजापन जैसी बहुत सारी बीमारियों से राहत मिलती है।

17. जूं – Louse (लोउसे)

जूं

जूं एक परजीवी कीड़ा है इंसान के शरीर पर रहता है जू सबसे ज्यादा इंसान के सिर में पाए जाते है जिस इंसान के सिर में पाए जाते है यदि उस इंसान का सिर दूसरे इंसान के सिर के सम्पर्क में आ जाये तो दूसरे इंसान के सिर में भी चढ़ जाते है।

जूं एक रात में असंख्य अंडे देते है जूं के छे पैर होते है एक मादा जूं एक दिन में पांच अंडे देती है और इन अंडो को परिपक्व होने में 8 दिन लगते है।

जूं एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए कूद सकते है उड़ सकते है और रेंग भी सकते है।

जूं अंडे से बाहर आने के बाद इंसान के सिर से चिपक जाते है और खून चूसना शुरू कर देते है इनका जीवनकाल 21 दिन का होता है।

18. जुगनू – Firefly (फ़िरेफली)

जुगनू

जुगनू खास तोर पर जंगलो और खेतो में देखने को मिलते है जब जुगनू उड़ते है तो उनके पीछे के हिस्से में कुछ लाइट जैसा चमकता है यह एक रासायनिक क्रिया के कारण चमकते है।

जुगनू अपने से छोटे कीड़े मकोड़ो को अपना भोजन बनाती है जुगनू से चमक निकलती है वह एक दूसरे को आकर्षित करने के लिए होती है यदि कोई दूसरा जुगनू दूर तो उसे सकेंत देने के लिए भी यह इस चमक का उपयोग करते है।

जुगनू खास तोर पर वही रहते है जहा पर वह जन्म लेते है जुगनू अपने अंडे जमीन के अंदर पेड़ की छाल में रखते है कुछ जुगनू के अंदर से काफी तेज चमक निकलती है जिन जुगनुओ में से तेज चमक निकलती है वह जुगनू दक्षिण अमेरिका और वेस्टइंडीज में बहुत अधिक देखने को मिलते है।

19. छिपकली – Lizard (लिज़र्ड )

छिपकली

छिपकली सरीसृप वर्ग का जंतु है जो सरक कर एक जगह से दूसरी जगह जाते है छिपकली उम्र 5 साल होती है।

छिपकली का शरीर ऊपर से चिकना होता है जिस पर छोटे कणिकशल्क पाए जाते है येउन पर छोटे छोटे कठोरीकृत शल्क होते है सिर पर सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते है और यह सिर की हड्डी से जुड़े रहते है। छिपकली समय समय पर अपने शरीर का परित्याग करती रहती है।

छिपकली की लम्बाई 3 इंच से 6 इंच की होती है एक छिपकली अपने एक अंडे को 12 महीने तक अपनी गर्दन में रख सकती है। छिपकली के अधिक तर बच्चे खुद ही चलने में सक्षम होते है।

20. झींगुर – Cricket (क्रिकेट)

झींगुर

झींगुर अंधेरे और नमी वाले स्थान पर अपने अंडे देते है झींगुर हरी पत्ती, कागज, कपड़े आदि खाते है।

झींगुर वारिश के समय रात में अधिक देखने को मिलते है नर झींगुर रात के समय अंधेरे स्थान में बैठ कर अपने दोनों पैरो को आपस में रगड़ा है जिससे झी झी की आवाज आती है।

झींगुर के शरीर के सामने के हिस्से में दो पतले एंटीने होते है इन एटीनो को एक लगातार हिलाते रहते है इनमे तीन जोड़ी पैर होते है।

कुछ लोगो को तो झींगुर देख कर घिन आती है क्योकि ये कही भी जा कर बैठ जाते है बच्चे भी इनसे बहुत डरते है क्योकि ये पल भर एक जगह से उझल कर दूसरी जगह पहुंच जाते है।

21. ततैया – Wasp (वास्प)

ततैया

ततैया एक प्रकार का कीट है कुछ ततैया छाता बना कर रहती है जिसमे एक अंडे देने वाली ततैया रहती है जिसे रानी कहते है।और अन्य ततैया कर्मी होती है।

कुछ ततैया ऐसी होती है जो अकेले रहना पंसद करती है अकेले रहने वाली ये मादा ततैया अपने भोजन के लिए अन्य कीटो को डंक मार कर बेहोश कर देती है और जब कीट बेहोशी की हालत में अंडे देते है तो ततैया उन अंडो में से निकलने वाले बच्चो को खा लेती है।

ततैया दिखने में बिल्कुल मधुमक्खी जैसा होती है ततैया कही भी छाता बना कर रहने लगती है और यदि इन्हे छेड़ा जाए तो ये तुरंत ही काट लेती है इनमे डंक पीछे की और होता है।

22. मक्खी – Fly (फ्लाई)

मक्खी

मक्खी हमारे चारो और पाए जाने कीड़ो में सबसे ज्यादा देखे जाने वाला कीड़ा है इससे कई सारे संक्रमण फैलते है।

इस मक्खी का जीवन काल केवल 6 से 10 सप्ताह का होता है यह मक्खी 6 से 10 सप्ताह में 22 बार अंडे दे देती है।

मक्खी में दो आँखे होती है जिससे वह आपने चारो और बहुत ही आसानी से देख सकती है मक्खी के पैर टांगो में बाटे होते है इनमे उड़ने के लिए झिल्ली जैसे पंख लगे होते है।

यह गंदी जगह जैसे सड़े गले खाद्य, मल मूत्र गोबर और गीले स्थान पर ज्यादा देखी जाती है यह गंदे स्थान पर बैठ कर हमारे शरीर पर या खाद्य पदार्थ पर बैठ कर कई सारी बीमारियों का कारण बनती है।

23. माहू – Aphid (एफिड)

माहू

माहू कीट फसल से रस निकालने वाला एक कीट है जो रबी की फसल को सबसे रस निकालता है इस कीट से फसलों को बचाने के लिए बाजार में कई रासायनिक कीटनाशक दवाइया उपलब्ध है।

माहू अपने मुँह के प्रयोग से पौधे के कोमल और मुलायम ऊतकों में छेद कर देते है छेद करने के बाद उस पौधे से रस निकालते है फसल से रस निकलने के कारण पैदावार पर कभी असर पड़ता है।

माहू कीट को आप दिसम्बर से ले कर फरवरी माह तक खेतो में देख सकते है माहू जब फसल से रस चूस लेता है जिससे फसल की ग्रोथ कम होती है बीज छोटे रह जाते है और यदि माहू तिलहन फसलों में लगता है तो उनके बीज से तेल भी कम निकलता है।

24. मकड़ी – Spider (स्पाइडर)

मकड़ी

आपने घर में अक्सर मकड़ी देखी होगी, अब तक मकड़ियों की लगभग 40,000 प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है ये घर के किसी भी कोने में जाला बना कर रहने लगती है।

एक मकड़ी एक साल में लगभग 2000 कीड़े खाती है और एक साल में 3000 से ज्यादा अंडे देती है मकड़ी के एक अंडे में चार सदस्तों के शरीर में पाए जाने वाले DNA जितना DNA पाया जाता है मादा मकड़ी का आकार नर मकड़ी से बड़ा होता है

मकड़ी का आकार सिरोवृक्ष और उदर में बटा होता है इसका उदर खंड रहित होता है सिरोवृक्ष में चार जोड़ी पैर होते है इसमें एक पेट होता है जिसमे चिपचिपा पदार्थ भरा रहता है इस चिपचिपे पदार्थ से मकड़ी अपना जाला बनाती है।

मकड़ी मांशाहारी कीट है यह अपने जाल में कीट को फसाती है और फिर उसे खाती है।

25. मच्छर – Mosquito (मॉस्क्वीटो)

 मच्छर

मच्छर एक ऐसा जीव है जिसके काटने से कई तरह की बीमारिया हो सकती है मच्छर में इतनी शक्ति होती है की वह इंसान की सांस को 75 फ़ीट दूर से भी सूघ लेता है।

मच्छर एक जहरीला कीट है लेकिन मच्छर में मादा मच्छर ही मनुष्य और अन्य जतुओं को काट कर रक्त चुस्ती है और कई बीमारियों का कारण बनते है लेकिन नर मच्छर केवल पेड़ पौधों का रस चूसते है।

26. मधुमक्खी – Bee ( बी )

मधुमक्खी

मधुमक्खी एक जहरीली मक्खी है जो समूह में छाता बना रहती है इनका छाता मोम का बना होता है। पूरे विश्व में मधुमक्खियों के केवल 5 प्रजातिया ही ऐसी जो शहद देती है बाकि की मधुमक्खियां ऐसे ही निवास करती है।

मधुमक्खियां मोम के बने छाते में शहद एकत्रित करती है मधुमक्खियां 1 kg शहद बनाने में कम 35 से 40 लाख फूलो का रस चुस्ती है।

मधुमक्खी में सुघने की क्षमता कुत्ते के बराबर होती है इसे व्यवसाय के लिए भी पाला जाता है क्योकि इससे शहद और मोम तो ऐसे पदार्थ मिलते है जिसके दाम बाजार में सबसे ज्यादा है।

मधुमक्खी का जीवनकाल 45 दिन का होता है मधुमक्खी एक घंटे में 183 बार अपने पंखो को हिलाती है।

27. मोगरी – Beetle (बीटल)

मोगरी

बीटल एक ऐसा कीड़ा है जिसकी बाजार में लाखो नहीं करोडो में है।

बीटल पृथ्वी पर मोजूद सबसे छोटी और दुर्लभ प्रजातियों में से है इसका आकार 2 से 3 इंच का है लेकिन स्टैग बीटल 8 सेंटीमीटर तक बढ़ता है।

28. मेंढक – Frog (फ्रॉग)

मेंढक

मेढ़क एक उभयचर प्राणी है मेढक की त्वचा चिपचिपी और चिकनी होती है और इसके त्वचा में नमी बनाये रखने के लिए म्यूकस नाम रसायन का स्राव होता है।

मेढ़क में श्वशन फेफड़ो के माध्यम से होता है यह शिकार पकड़े जीभ का इस्तमाल करते है और यह शिकारी से बचने के लिए वातावरण के अनुकूल हो जाता है।

इनकी बहुत सी प्रजातिया होती है जिनके अकार रंग और और शारीरिक संरचना अलग – अलग होती है।

मेढक मांसाहारी जीव है यह अपना पेट भरने के लिए तितली, घोघा, मछली, कीड़े और टेडपोल को खा जाता है।

29. दहिया कीट – Mealy Bug (मीली बग)

दहिया कीट

दहिया कीट चींटी से थोड़े बड़े आकार का होता है यह सफेद रंग का होता है।

दहिया कीट फूल का रस चूस लेटे है जिससे फसल और फूल दोनों ख़राब हो जाते है और किसान को नुकसान होता है।

यह आम के मोर बौर का रस चूस लेती है जिससे फलो की संख्या घट जाती है।

30. दीमक – Termite (टर्मीटे)

दीमक

दीमक एक छोटा सा कीट है यह कीट बहुत ही नुकसानदेह होता है यह लकड़ी को कुतरने वाला कीट जो लड़की बने दरवाजे, खिड़की, फर्नीचर और कॉपी किताबो को भी अंदर ही अंदर खोखला कर देते है और हमे पता भी नहीं चलता।

यह कीट बारिश के मौसम में अधिक नुकसान पहुंचाते है इसीलिए इसने बचाव के लिए घर के आस पास की नालियों और गटर को हमेशा साफ कराते रहे और और बारिश के मौसम में कंट्रोल का छिड़काव जरूर करवाते रहे।

31. टिड्डा – Grasshopper (ग्रासशोप्पेर)

टिड्डा

टिड्डा 6 पैर वाला कीट है इसका पूरा शरीर खंडो में विभक्त होता है जितनी भी प्लेट होती है सभी अलग अलग ऊतक से जुडी होती है।

इसमें सयुक्त आँखे होती है जिनकी सहायता से यह सभी दिशाओ में देख सकते है।

इनमे उड़ने के लिए दो जोड़ी पंख होते है वयस्क टिड्डे के पंख लम्बे होते है जिससे बे लम्बी दूरी तय कर सकते है।

टिड्डे का जीवन चार चरणों में बटा होता है अंडा, लार्वा, प्यूपा और वयस्क लेकिन इसके लाइफ साइकल तीन चरण बटी होती है अंडा निम्फ और वयस्क।

एक टिड्डा एक दिन में अपने बजन के बराबर खाना खा लेता है खाना की कमी होने पर ये एक दूसरे के ऊपर कूदते है कभी कभी एक दूसरे को खा तक लेते है।

32. टिड्डी – Locust (लोकस्ट)

टिड्डी

मादा टिड्डे को टिड्डी कहते है इनका आकार बिल्कुल टिड्डे के जैसा होता है।

टिड्डी अंडे देते समय बिल्कुल सुस्त और शांत रहती है और एक ही पर बैठी रहती है टिड्डी का जीवनकाल 3 से 6 माह का होता है।

खाने की कमी होने पर ये अपने अंडे भी खा लेती है लेकिन आम तोर पर बिना कुछ खाये ये 3 महीने तक जीवित रह सकती है।

टिड्डिया सारा दिन खाने की खोज में एक जगह से दूसरी जगह फुदकती रहती है शाम का ठंडा मौसम होते ही पेड़ से चिपक जाती है।

33. तितली – Butterfly ( बटरफ्लाई )

तितली

तितली भी एक कीट ही है जिसके जीवन की शुरुआत एक अंडे से होती है इसके जीवन च्रक में कई चरण होते है जैसे पहले अंडा, लार्वा, कैटरपिलर, प्यूपा, प्यूपा के बाद इसमें पंख आ जाते है धीरे धीरे वयस्क हो जाती है और तितली बन जाती है।

मादा तितली अंडे देती है अंडे हैच बनने में लगभग 5 दिन लगते है इसी चरण में आगे बड़े जाती है इसके पंख बहुत नरम होते है इन्हे हाथ से छूने पर बहुत नरम महसूस होता है जब हम तितली को हाथ से छूते है तो तितली के पंख का रंग हमारी उंगलियों में लग जाता है।

तितली फूलो के रस को चूसती है इसीलिए यह फूलो की तलाश में हमेशा एक जगह से दूसरी जगह उड़ती रहती है इनमे पैरो की संख्या 4 होती जिसके सहायता से यह फूल की पंखुड़ी पर चिपक कर रस को चुस्ती है।

34. तना भेदक कीट – Stem Borer Insect (स्टेम बोरर इन्सेक्ट)

तना भेदक कीट

तना भेदन कीट फसल के तने के अंदर घुस कर कर तने को खोखला कर देता है जिससे पेड़ पौधे पीले पड़ने लगते है और कुछ दिनों बाद सुख जाते है।

यह कीट मक्के की फसल को खराब करता है क्योकि मक्के दाने बहुत मीठे होते है इन बीजो को यह कीट अंदर ही खत्म कर देता है।

इन कीट के मुँह बहुत ही कठोर होता है यह बहुत ही सरलता से किसी पौधे के तने में घुस जाता है।

35. तिलचट्टा कॉक – Cockroach (कॉकरोच)

तिलचट्टा कॉक

तिलचट्टा रात्रिचर प्राणी है यह अंधेरी और गर्म जगह पर सबसे ज्यादा देखा जाता है इसका शरीर तीन भागो सिर, वक्ष और उदर में बटा होता है।

कॉकरोच की सबसे बड़ी ख़ासिय यह है की अपनी सास को कम से कम 40 मिनट तक रोक के रख सकता है और इसका जीवन काल 1 साल का होता है।

36. पिस्सू – Flea (फ्लेक्स)

पिस्सू

पिस्सू एक छोटा सा कीट है जो जानवरो के शरीर में कही भी चिपका रहता है और जानवरो के शरीर से रक्त चूसता रहता है।

पिस्सू की कुछ ऐसी प्रजाति ऐसी होती है जिसने टाइफस और बुबोनिक प्लेग जैसी बीमारिया फैलती है।

जब पिस्सू इंसान के शरीर में चिपकता है तो उस जगह में खुजली होती लाल निशान आ जाता और सूजन आ जाती है यह धीरे धीरे शरीर अंदर घुस जाता है।

यह अपना जीवन मिटटी में भी व्यतीत कर सकते है।

37. बिच्छु – Scorpian (स्कॉर्पियन)

बिच्छु

बिच्छु का शरीर दो भाग शिरोवक्ष और उदर में बटा होता है इसलिए यह लम्बा और चपटा होता है।

शिरोवक्ष के पृष्ठ सतह पर एक जोड़ी बड़ी आँखे होती है और अग्र पृष्ट पर अनेक छोटी छोटी आँखे होती है।

इसे पीछे वाले मोटासोमा में 5 लम्बे बेलनाकार खंड होते है जिसके आखरी खंड में पूछ लगी होती है जिसके एक विष ग्रंथी जुडी होती है।

बिच्छू के मुँह से ले कर पूछ के आधार में आधारतल पर स्थित गुदा तक फैली सीधी आहारनाल तक होती है।

38. सीप – Oyster (ओएस्टर)

सीप

सीप पानी में रहने वाला जीव है इसके शरीर में दो कपाट होते है जो एक दूसरे से मध्य पृष्ट पर मास पेशियों से जुड़े रहते है।

इनमे पानी में या रेत में चलने के लिए मांसल पैर होते है पैर के ऊपरी भाग में अनेक समांतर रेखाएं होती है।

सीप के अंदर एक नैकर नामक पदार्थ का स्राव होता है यदि सीप के अंदर बालू का कण या बारिश के बूंद चली जाती है नैकर का जो स्त्राव होता है वह बालू के कण के ऊपर परत बनाता जाता है जिससे कुछ समय बाद बालू का कण मोती का रूप है।

39. शंख – Conch (कोंच)

शंख

शंख पृथ्वी की एक अनमोल सरंचना है शंख का निर्माण चुने से होता है।

समुद्र में रहने वाले मॉलस्क जीव समुद्र के पानी से चुना प्राप्त करके शंख का निर्माण करते है और इसे अपना आवास बना कर रहते है जब उन जीवो की मृत्यु हो जाती है तो शंख पानी के ऊपर तैरने लगते है।

40. झींगा – Prawn (प्रॉन)

झींगा

झींगा एक मछली है जो समुद्र के खारे जल में रहती है लेकिन इसके पालन पोखर, झील, तालाब और बांध के मीठे जल में किया जा सकता है।

झींगा मछली के शरीर में कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते है तो हमारे शरीर को अति आवश्यक इसीलिए इसकी कीमत अन्य मछलियों से अधिक है।

इसका शरीर सिर और धड़ दो भागो में बटा होता है इसका पेट लम्बा और पतला होता है।

झींगा मछली में सांस लेने के लिए अन्य मछलियों की तरह गलफटे होते है।

41. गेहुयन – Cobra ( कोबरा )

गेहुयन

कोबरा सांप को किंग कोबरा के नाम से भी जाना जाता है क्योकि इसका शिकार करना आसान नहीं है इसे सबसे खतरनाक और जहरीला सांप माना जाता है।

किंग कोबरा में मादा कोबरा साल में एक बार ही अंडे देती है यह अपने अंडे को रखने के लिए एक घोसला बनाती है इसीलिए इसे दुनिया का पहला सांप माना जाता है जो घोसला बना कर अपने अंडे रखता है।

यह संसार का सबसे जहरीला और लम्बा सांप है इसकी लम्बाई 5.6 मीटर तक होती है।

42. हंस – Swan ( स्वान )

हंस

हंस एक ऐसा जीव है जो ठंडे मौसम को पंसद करता है इसे भारत का जीव नहीं माना जाता है यह अधिक तर यूरोप और साइबेरिया में पाए जाता है।

हंस का भोजन मछली और जैसे जलचर जीव होते है हंस पानी में तैरने के साथ आसमान में उड़ भी सकता है।

हंस कि 6 से 7 प्रजातिया पाए जाती है जिनमे से आस्टेलिया कई रंग के हंस देखे गए है।

43. मेढ़क के बच्चे – Toad (टॉड)

मेढ़क के बच्चे

मेढक एक उभयचर जीव है जिसके बच्चे को टेडपोल कहा जाता है मेढ़क अपने बच्चो को अंडे के रूप में जन्म देता है जो पानी की ऊपरी सतह पर तैरते रहते है।

जब मेढ़क के अंडे फूटते है तोउनमेसे मछली के छोटे बच्चे जैसी शरीरिक संरचना में बाहर निलते है जो धीरे धीरे वयस्क हो कर मेढ़क की अवस्था में आ जाते है।

44. मछली – Fish (फिश)

मछली

मछलिया कई तरह की होती है उसी तरह उनका जीवनकाल भी अलग अलग होता है यह अपना जीवन पानी में रह कर गुजारती है।

जिस तरह प्र्तेक जीव जीवित रहने के लिए जल और ऑक्सीजन की जरूरत होती है उसी तरह मछली को भी इन दोनों बहुत ज्यादा जरूरत होती है इसीलिए मछली में जल के अंदर रहने के बाद भी सांस लेने के लिए गलफटे होते है जो पानी और साँस दोनों को अंदर बाहर करते रहते है।

45. रेशम का कोया – Cocoon (कोकून)

रेशम का कोया

रेशम का कोया का पालनरेशम के उत्पादन के लिए किया जाता है रेशम एक लेई जैसे पदार्थ का स्राव करता है रेशम बनाने वाले ग्रंथिया लार ग्रंथियों का रूपांतर होती है।

रेशम कीट खुद प्यूपा अवस्था में स्वयं को इस तंतु के द्वारा अवतरित करता है बाद में प्यूपा कोकून में परिवर्तित हो कर रेशन बनाना शुरू कर देता है।इसे सेरीकल्चर भी कहा जाता है।

आशा है कीड़ो के नाम की जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

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